<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>
<!DOCTYPE rss [<!ENTITY % HTMLlat1 PUBLIC "-//W3C//ENTITIES Latin 1 for XHTML//EN" "http://www.w3.org/TR/xhtml1/DTD/xhtml-lat1.ent">]>
<rss version="2.0" xml:base="http://hi.internationalism.org">
<channel>
 <title>इंटरनेशनल कम्‍युनिस्‍ट करण्‍ट - दुनिया के मज़दूरों, एक हों!</title>
 <link>http://hi.internationalism.org</link>
 <description></description>
 <language>hi</language>
<item>
 <title>रुसी इंकलाब का पतन</title>
 <link>http://hi.internationalism.org/1999/russia</link>
 <description>&lt;p&gt;1917 का रुसी इंकलाब पहले वि‍श्‍वयुद्व में उभरी सर्वहारा क्रांति‍ की वि‍श्‍व क्रांति‍कारी लहर का सर्वोच्‍च बि‍न्‍दू था। पूंजीवादी चढाव से पतनशीलता के मोड पर स्‍थि‍त यह वह घड़ी थी जब मज़दूर वरग ने रुस में पूंजी की सत्‍ता को उखाड फेंका। उसने पूंजी  तथा श्रम   में वि‍श्‍वव्‍यापी मुठभेडों का द्वार खोला। इस अर्थ में यह मज़दूर वरग का अब तक का सर्वाधि‍क समृद्द तजरूबा था।&lt;br /&gt;
पर रूसी इंकलाब अलग-थलग पड गया और 1925-26 के आते आते अद्यःपतन का शि‍कार हो गया। रूस में पूंजीवाद ने राज्‍यपूंजीवाद के अति‍ भौंडे तथा विकृत रूप, स्‍तालि‍नवाद, का रूप लि‍या। आगामी सात दशकों तक स्‍तालि‍नवाद को एक तरफ मज़दूर वरग को कुचलने के लि‍ए इस्‍तेमाल कि‍या गया। दूसरी ओर उसे मज़दूर वरग को  गुमराह करने तथा साम्‍यवाद के मुक्‍ति‍कामी वि‍चारों को बदनाम करने के लि‍ए इस्‍तेमाल कि‍या जाता रहा। और 1989 से स्‍तालि‍नवाद के पतन को मज़दूर वरग के खि‍लाफ एक नए अभि‍यान के लि‍ए प्रयोग कि‍या जा रहा है...&lt;/p&gt;
</description>
 <pubDate>Thu, 10 Nov 2005 19:42:08 -0600</pubDate>
</item>
<item>
 <title>‘चीनी क्रान्ति’ पर</title>
 <link>http://hi.internationalism.org/1999/china</link>
 <description>&lt;p&gt;आधि‍कारक इति‍हास मुताबि‍क 1948 में चीन में लोकप्रिय इंकलाब विजयी रहा। जनतंत्रवादी पश्‍चि‍म एवम माओवादी दोनो इस वि‍चार के बराबर पक्षधर हैं। यह स्‍तालि‍नवादी प्रति‍क्रांति‍ जनि‍त तथाकथि‍त “समाजवादी देशों”  की रचना वि‍षयक वि‍शाल भ्रमजाल का हि‍स्‍सा है। यह तय है कि‍ 1919 और 1927 के बीच चीन महत्‍वपूर्ण मज़दूर आंदोलन में से गुज़रा जो उस बक्‍त दुनि‍या को हि‍लाती अंतर्राष्‍ट्रीय लहर का अभि‍न्‍न हि‍स्‍सा था। पर यह आंदोलन मज़दूर वरग के संहार द्वारा डूबो दि‍या गया। पूंजीवादी प्रचारक जि‍से “चीनी इंकलाब की वि‍जय” के रूप में पेश करते हैं वह केवल राज्‍यपूंजीवादी शासन के माओवादी रूप की स्‍थापना थी। यह सर्वहारा क्रांति‍ की हार के बाद 1928 से चीन में भडके साम्राज्‍यवादी युद्व के दौर का चरम था।&lt;/p&gt;
</description>
 <pubDate>Thu, 10 Nov 2005 19:36:40 -0600</pubDate>
</item>
<item>
 <title>2003 का इराक युद्ध</title>
 <link>http://hi.internationalism.org/2003/iraq</link>
 <description>&lt;p&gt;एक बार फि‍र मध्‍यपूर्व आतंक की गि‍रफ्त में है। एक बार फिर इराक पर बंमों की आग बरसाई जा रही है। एक तरफ “सभ्‍य” ताकतें पहले ही भुखमरी की शि‍कार आबादी पर मौत तथा बदहाली बरपा कर रही हैं। दूसरी ओर सारी दुनि‍या को झूठों की बाढ में डुबोया जा रहा है। ताकि‍ जंग उचि‍त ठहराई जा सके। ताकि‍ जंग के हर सच्‍चे वि‍रोध को वि‍कृत तथा भ्रमि‍त कि‍या जा सके।…&lt;/p&gt;
</description>
 <pubDate>Wed, 19 Mar 2003 19:20:29 -0600</pubDate>
</item>
<item>
 <title>अफगान युद्ध</title>
 <link>http://hi.internationalism.org/2001/afghan</link>
 <description>&lt;p style=&quot;MARGIN-BOTTOM: 0cm&quot; align=&quot;justify&quot;&gt;6000 &lt;font face=&quot;Tahoma&quot;&gt;अमेरि‍की नागरि‍कों को मौत के घाट उतारते &lt;/font&gt;11 &lt;font face=&quot;Tahoma&quot;&gt;सि‍तंबर &lt;/font&gt;2001 &lt;font face=&quot;Tahoma&quot;&gt;के घिनोने अपराध के ‍जवाब में अमेरि‍का तथा उसके मित्र अफगानि‍स्‍तान पर हमला करके और भी घि‍नोने कहर बरसा रहे हैं।&lt;/font&gt;&lt;/p&gt;
</description>
 <pubDate>Sun, 07 Oct 2001 19:58:01 -0500</pubDate>
</item>
</channel>
</rss>
